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Saturday, 29 December 2012
जिन्हें नाज़ है हिंद पे वो कहाँ है .. कहाँ है .. कहाँ है ?
जिन्हें नाज़ है हिंद पे वो कहाँ है ... कहाँ है ... कहाँ है ???
Sunday, 11 November 2012
ओ मांझी चल
ओ मांझी चल \-४
तू चले तो छम\-छम बाजे मौजों की पायल
ओ मांझी चल, ओ मांझी चल, ओ मांझी चल, ओ ओ मांझी
चल
(तेरा जीवन नदीया की धार है
तन है नैय्या, मन पतवार) \-२
सुन ओ मांझी, मौजों की पुकार है
थाम ले तू
थाम ले तू मस्त पवन का, लहराता आंचल
ओ मांझी चल, ओ मांझी चल, ओ मांझी चल, ओ ओ मांझी
चल
(आशाओं से नाता जोड ले
ये निराशा के बंधन तोड दे) \-२
सुन ओ मांझी, आज का गम तू छोड दे
आज तो पीछे
आज तो पीछे रह गया है, सामने है कल
ओ मांझी चल, ओ मांझी चल, ओ मांझी चल, ओ ओ मांझी
चल
गीतकार /
Lyricist: आनंद
बक्षी-(Anand Bakshi) ओ मांझी रे, अपना किनारा, नदिया की धारा है
ओ मांझी रे, अपना किनारा, नदिया की धारा है
ओ मांझी रे ...
साहिलों पे बहने वाले
कभी सुना तो होगा कहीं, ओ
...
हो, कागज़ों की कश्तियों का
कहीं किनारा होता नहीं
हो मांझी रे ... मांझी रे
कोई किनारा जो किनारे से मिले वो,
अपना किनारा है ...
ओ मांझी रे ...
पानियों में बह रहे हैं
कई किनारे टूटे हुए ओ ...
हो, रास्तों में मिल गए
हैं
सभी सहारे छूटे हुए ...
कोइ सहारा मझधारे में मिले वो,
अपना सहारा है ...
ओ मांझी रे, अपना किनारा, नदिया की धारा है
ओ मांझी रे ...
- गुलज़ार
- गुलज़ार
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