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Saturday, 29 December 2012

जिन्हें नाज़ है हिंद पे वो कहाँ है .. कहाँ है .. कहाँ है ?


जिन्हें नाज़ है हिंद पे वो कहाँ है ... कहाँ है ... कहाँ है ???

ये कूचे ये नीलाम घर दिलकशी के
ये लुटते हुए कारवां जिन्दगी के
कहाँ हैं, कहाँ हैं मुहाफ़िज़ ख़ुदी के?

जिन्हें नाज़ है हिंद पे वो कहाँ है ... कहाँ है ... कहाँ है ???

ये पुरपेंच गलियां, ये बेख़ाब बाज़ार
ये गुमनाम राही, ये सिक्कों की झंकार
ये इस्मत के सौदे, ये सौदों पे तकरार

जिन्हें नाज़ है हिंद पे वो कहाँ है ... कहाँ है ... कहाँ है ???

तअफ्फ़ुन से पुर नीमरोशन ये गलियां
ये मसली हुई अधखिली ज़र्द किलयां
ये बिकती हुई खोकली रंग रिलयां

जिन्हें नाज़ है हिंद पे वो कहाँ है ... कहाँ है ... कहाँ है ???

वो उजाले दरीचों में पायल की छन-छन
तनफ़्फ़ुस की उलझन पे तबले की धन-धन
ये बेरूह कमरों में खांसी की धन-धन

जिन्हें नाज़ है हिंद पे वो कहाँ है ... कहाँ है ... कहाँ है ???

ये गूंजे हुए क़ह-क़हे रास्तों पर
ये चारों तरफ़ भीड़ सी खिड़िकयों पर
ये आवाज़ें खींचते हुए आंचलों पर

जिन्हें नाज़ है हिंद पे वो कहाँ है ... कहाँ है ... कहाँ है ???

ये फूलों के गजरे, ये पीकों के छींटे
ये बेबाक नज़रें, ये गुस्ताख़ फ़िक़रे
ये ढलके बदन और ये मदक़ूक़ चेहरे

जिन्हें नाज़ है हिंद पे वो कहाँ है ... कहाँ है ... कहाँ है ???

ये भूकी निगाहें हसीनों की जानिब
ये बढ़ते हुए हाथ सीनों की जानिब
लपकते हुए पांव ज़ीनों की जानिब

जिन्हें नाज़ है हिंद पे वो कहाँ है ... कहाँ है ... कहाँ है ???

यहां पीर भी आ चुके हैं जवां भी
तनूमन्द बेटे भी, अब्बा मियां भी
ये बीवी भी है और बहन भी है, मां भी

जिन्हें नाज़ है हिंद पे वो कहाँ है ... कहाँ है ... कहाँ है ???

मदद चाहती है ये हव्वा की बेटी
यशोदा की हमजिन्स राधा की बेटी
पयम्बर की उम्मत ज़ुलैख़ा की बेटी

जिन्हें नाज़ है हिंद पे वो कहाँ है ... कहाँ है ... कहाँ है ???

ज़रा मुल्क के राहबरों को बुलाओ
ये कूचे ये गलियां ये मन्ज़र दिखाओ
जिन्हें नाज़ है हिंद पे उन को लाओ

जिन्हें नाज़ है हिंद पे वो कहाँ है ... कहाँ है ... कहाँ है ???

-
साहिर लुधियानवी
सोनी सोरी,आरती माझी,हिड़मे,सीते,आइती और इन जैसी हजारों महिलाऔ  को न्याय मिलना चाहिए ये अभी जिन्दा हैं |

Sunday, 11 November 2012

ओ मांझी चल


ओ मांझी चल \-
तू चले तो छम\-छम बाजे मौजों की पायल
ओ मांझी चल, ओ मांझी चल, ओ मांझी चल, ओ ओ मांझी
चल
 
(तेरा जीवन नदीया की धार है
तन है नैय्या, मन पतवार)    \-
सुन ओ मांझी,  मौजों की पुकार है
थाम ले तू
थाम ले तू मस्त पवन का, लहराता आंचल
ओ मांझी चल, ओ मांझी चल, ओ मांझी चल, ओ ओ मांझी
चल
 
(आशाओं से नाता जोड ले
ये निराशा के बंधन तोड दे)   \-
सुन ओ मांझी, आज का गम तू छोड दे
आज तो पीछे
आज तो पीछे रह गया है, सामने है कल
ओ मांझी चल, ओ मांझी चल, ओ मांझी चल, ओ ओ मांझी
चल
                                                      गीतकार / Lyricist:  आनंद बक्षी-(Anand Bakshi) 

ओ मांझी रे, अपना किनारा, नदिया की धारा है



ओ मांझी रे,  अपना किनारा,  नदिया की धारा है
ओ मांझी रे ...



साहिलों पे बहने वाले
कभी सुना तो होगा कहीं, ओ ...
हो,  कागज़ों की कश्तियों का
कहीं किनारा होता नहीं
हो मांझी रे ... मांझी रे
कोई किनारा जो किनारे से मिले वो,
अपना किनारा है ...
ओ मांझी रे ...


पानियों में बह रहे हैं
कई किनारे टूटे हुए ओ ...
हो, रास्तों में मिल गए हैं   
सभी सहारे छूटे हुए ...
कोइ सहारा मझधारे में मिले वो,
अपना सहारा है ...

ओ मांझी रे,  अपना किनारा,  नदिया की धारा है
ओ मांझी रे ...
                                          - गुलज़ार